Saturday, 21 January 2012

जीवन है तो चिंताएं हैं

जीवन   है    तो    चिंताएं   हैं ,
ये  सिक्के   के   दोनों    पहलू |
तुम   कहो   तुम्हारी     चिंताएं
अपनी   चिंताएं   मैं   कह    लूँ |

एक   दूजे   को   संबल  दे  दें ,
हौसला    बढ़ाएं    हम   अपना |
सह सको  व्यथा  तुम   जीवन की
अपनी   पीडाये   मैं   सह   लूँ |

मन   हल्का  कर लें  कह सुन कर
कुछ  भार  हिया  का  कम  तो हो|
 उँगली    थामे    उम्मीदों    की ,
पगडण्डी   एक   नयी   गह    लूँ |

कुछ    कड़वी   तीखी      बोछारें
कुछ    खारे    पानी   की    बूंदे |
मिल  एक  लहर    सी बन   जाऊं
फिर  लहरों   के  संग  संग  बह लूँ



10 comments:

  1. बहुत सार्थक भावपूर्ण प्रस्तुति, सुंदर रचना,बेहतरीन पोस्ट....
    new post...वाह रे मंहगाई...

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  2. एक दूजे को संबल दे दें ,
    हौसला बढ़ाएं हम अपना |
    सह सको व्यथा तुम जीवन की
    अपनी पीडाये मैं सह लूँ |

    Bajpai ji bahut hi sundar bhavon ke sath hriday ke taron ko jhankrit karti hui rachana ap ne likhi hai .....sadar abhar . mai apko apne nye post pr amantran de raha hoon.

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  3. कुछ कड़वी तीखी बोछारें
    कुछ खारे पानी की बूंदे |
    मिल एक लहर सी बन जाऊं
    फिर लहरों के संग संग बह लूँ

    sarthak post hae

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  4. कुछ कड़वी तीखी बोछारें
    कुछ खारे पानी की बूंदे |
    मिल एक लहर सी बन जाऊं
    फिर लहरों के संग संग बह लूँ ...

    जीवन की लहर तो यूँ भी चलती रहनी चाहिए ... तीखी कडुवी या मीठी वो तो किस्मत है ...

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  5. आपकी रचना लाजवाब है...शब्द और भाव बेजोड़...वाह...

    नीरज

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  6. एक दूजे को संबल दे दें ,
    हौसला बढ़ाएं हम अपना |
    सह सको व्यथा तुम जीवन की
    अपनी पीडाये मैं सह लूँ |

    सुंदर पंक्तियाँ ... सहज सकारात्मक भाव लिए ...

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  7. bahut khoob. gagar me sagar........

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  8. बहुत सुन्दर सार्थक सन्देश। धन्यवाद।

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  9. हर जीवन अपनी और अन्य की पीड़ाएँ साथ ले कर चलता है. सुंदर कविता.

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