मैं उम्र भर लड़ती रही ,
बेटा बेटी का अंतर मिटाने के लिए |
थाम कर हाथ मे परचम ,
करती रही नेतृत्व समानता का |
लेकिन वही अंतर खड़ा है ,
आज मेरे द्वार पर ढीट बन के ,
कह रहा है तुम लड़की वाले हो ........
बेटा बेटी का अंतर मिटाने के लिए |
थाम कर हाथ मे परचम ,
करती रही नेतृत्व समानता का |
लेकिन वही अंतर खड़ा है ,
आज मेरे द्वार पर ढीट बन के ,
कह रहा है तुम लड़की वाले हो ........
