Sunday, 17 June 2012

शब्दों की नाव


शब्दों की नाव बना कर ....
कूद पड़ी हूँ
 अभिव्यक्ति के सागर में
भर लिया है
 भुजाओं में बल विचारों का......
पतवार है सम्वेदनाओं की .....
भावनाओं की लहरों के संग बहते बहते
अभी तो मिलना है
चिंतन मनन और
 ज्ञान की अनेकों तरंगों  से .......
जिनके आश्रय से
 एक एक पग बढ़ेगी मेरी नाव
और मैं पहुच जाऊँगी उस पार !!!
मेरे सपनों के गाँव में .....
जहाँ जोहते हैं बाट
सृजन के पाँखी......
अपने परों पर सहेजे हवाओं की सोंधी गंध
और जोहते हैं बाट
छंदों के वृक्ष
अपने पत्तों पर
 मुक्तक की बूँदें समेंटे ओस की  तरह
इन बूंदों से गुजर कर आएगी जब
प्राची की रश्मि.....
 रस और अलंकार के रंगों में नहाई तब ........
होगी सतरंगी भोर
मेरे सपनों के गाँव में
ममता


19 comments:

  1. होगी सतरंगी भोर
    मेरे सपनों के गाँव में

    बहुत बेहतरीन सुंदर रचना,,,,,

    RECENT POST ,,,,,पर याद छोड़ जायेगें,,,,,

    ReplyDelete
  2. यूं ही होता रहे सृजन और सपने सजते रहें ...

    ReplyDelete
  3. जब नांव निकल पड़ी है, तो पहुंचेगी ही, ... सपनों के गाँव में.. :)
    सुन्दर!
    सादर

    ReplyDelete
  4. होगी सतरंगी भोर
    मेरे सपनों के गाँव में

    waah ...ho gayi satrangi bhor ...
    sundar rachna .shubhkamnayen.

    ReplyDelete
  5. बहुत बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

    ReplyDelete
  6. रस और अलंकार के रंगों में नहाई तब ........
    होगी सतरंगी भोर
    मेरे सपनों के गाँव में,,,,

    बहुत बेहतरीन सुंदर रचना,,,,,

    RECENT POST ,,,,,पर याद छोड़ जायेगें,,,,,

    ReplyDelete
  7. मेरे सपनों के गाँव में .....
    जहाँ जोहते हैं बाट
    सृजन के पाँखी......

    वाह ... सृजन के पाखी तो हर द्वार गली सपने लम्हों में मिल जाते हैं पर शौअद उठते या जागते सिर्फ सपनों की दुनियामें ही है ... और काव्य का सृजन करते हैं ...

    ReplyDelete
  8. वाह ... बहुत खूब

    ReplyDelete
  9. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...भावों और शब्दों का सुन्दर संयोजन...

    ReplyDelete
  10. एकदम कविता सी सुन्दर कविता..

    ReplyDelete
  11. छंदों के वृक्ष
    अपने पत्तों पर
    मुक्तक की बूँदें समेंटे
    ओस की तरह
    इन बूंदों से गुजर कर
    आएगी जब
    प्राची की रश्मि.....
    रस और अलंकार के रंगों में नहाई


    बहुत अच्छे बिंब..सुन्दर भाव...

    ReplyDelete
  12. काव्य के सारे उपादान प्रस्तुत हैं -अब काहे की कमी !

    ReplyDelete
  13. बहुत बेहतरीन सुंदर रचना,,,,,

    ReplyDelete
  14. जीवन की लहरों पर शब्दों की नाव चलती रहती है. सुंदर रचना.

    ReplyDelete
  15. बहुत ही सुंदर रचना ....
    बस ये नाव चलती रहनी चाहिए ...
    साभार !!

    ReplyDelete
  16. बहुत सुंदर प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट छाते का सफरनामा पर आपका ङार्दिक अभिनंदन है । धन्यवाद ।

    ReplyDelete
  17. बहुत सुंदर प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट छाते का सफरनामा पर आपका ङार्दिक अभिनंदन है । धन्यवाद ।

    ReplyDelete